पूर्ण परमात्मा का संविधान

 पूर्ण परमात्मा का  संविधान




📗 🖊️पूर्ण परमात्मा का संविधान क्या है ?

 📗🖊️पूर्ण परमात्मा के संविधान के विरुद्ध (अपराध)  क्या है ?

 और आइए इसकी जानकारी हम विस्तार से जानते है 

पूर्ण परमात्मा  कुल का मालिक एक है हम सब उसके बच्चे हैं
 और परमात्मा ने नियम और कानून सबके लिए समान बनाए हैं चाहे हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई किसी भी धर्म से हो धर्म इंसान ने बनाए हैं भगवान ने नहीं भगवान ने केवल मनुष्य बनाया था जाति और धर्म इंसान ने बनाए हैं जो परमात्मा के संविधान के विरुद्ध है
पूर्ण परमात्मा एक है तो उसको पाने की विधि भी एक ही होगी फिर हम सभी धर्म के लोग अलग-अलग साधना अलग-अलग पूजा क्यों करते हैं

पूर्ण परमात्मा के संविधान के विरुद्ध क्या है

📚भगवान के संविधान में क्या है अपराध 👇
जीव हत्या करना ✖️ किसी भी जीव को सताना ✖️ नशा करना✖️
✖️चोरी करना✖️झूठ बोलना✖️रिश्वत खोरी✖️परस्त्री गमन करना✖️चनाना✖️निंदा करना✖️जुआ करना✖️हिंसा करना✖️ दहेज लेना व दहेज देना 
सभी अपराध है, 

पूर्ण  परमात्मा का संविधान

🖊️📚📚👇
आज परमात्मा की दया से विज्ञान ने मनुष्य को सभी सुख सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं उन सभी सुख सुविधाओं का उपभोग करते हुए मनुष्य परमात्मा को भूल सा गया है और जाने अनजाने में बहुत अपराध कर बैठता है जिससे परमात्मा के विधान में उनको पीड़ा दी जाती है जिससे मनुष्य बहुत दुखी होता हैं 


छुआछूत करना अपराध है


छुआछूत, ऊंच-नीच व जात-पात का भेदभाव रखने वाले परमात्मा के दोषी हैं। सब परमात्मा के बंदे हैं। परमात्मा किसी के साथ भेदभाव नहीं करता। हम क्यों करें।

जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा ।

हिन्दु मुसलिम सिक्ख ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा ।।

जीव हत्या करना महापाप है


  परमात्मा की संविधान में साफ लिखा है की जीव हत्या करना महापाप है यहां तक की हत्या करना तो दूर किसी जीव को सताना भी महापाप होता है

कबीर मांस अहारी मानव राक्षस जान ।
तिनकी संगत मती करें होवे भक्ति में हानि ।।

बकरी खाती बात है उसका बुरा हाल ।
जो बकरी को काट खाए उनका कौन हवाल ।।

परमात्मा कहते हैं की मांस खाने वाले कि कभी संगत नहीं करनी चाहिए उससे भक्ति में हानि होती है विचार करें की बकरी पति खाती है घास फूस खाते हैं जब लोग उसका इतना बुरा हाल करते हैं तो जो बकरी को ही काट कर खाता है उसका क्या हाल होगा




 परस्त्री गमन


जो व्यक्ति अन्य स्त्री से अवैध संबंध बनाता है, उस पाप के कारण वह सत्तर जन्म अंधे के प्राप्त करता है।
गरीब, परद्वारा स्त्री का खोलै। सत्तर जन्म अंधा हो डोलै।।

 परस्त्री को आयु अनुसार माता, बहन या बेटी के भाव से जानें।


पुरूष यति (जति) सो जानिये, निज त्रिया तक विचार।
माता बहन पुत्री सकल और जग की नार।।
नारी को देखिए बहन बेटी के भाव ।
 कहे कबीर कामनाश का यह है सहज उपाय ।।
द्वारा स्त्री का खोलें ।
 जन्म अंधा हो डोले ।।

कबीर, चोरी जारी वैश्या वृति, कबहु ना करयो कोए।
पुण्य पाई नर देही, ओच्छी ठौर न खोए।।

 जो मानव चोरी, डकैती, ठगी, वैश्यागमन करते हैं, वे लमहाअपराधी हैं। जो स्त्रियां वैश्या का धंधा करती हैं, वे भी महाअपराधी हैं। परमात्मा के दरबार में उनको कठिन दण्ड दिया जाएगा।



नशा करना महापाप है 


तम्बाकू सेवन करना महापाप है | तमा + खू = तमाखू।


यह तमाखू गाय के रक्त से उपजा है। तमाखू का सेवन करने से गाय का खून पीने के समान पाप लगता है।

तम्बाकू पीना सबसे भयंकर अपराध बताया गया है । भक्ति मार्ग में बहुत बाधक होता है
यह गाय के खून से उपजा है ।
 कबीर वाणी 
खू नाम खून का तमा नाम गाय ।
सौगन्ध सौ बार इसकूँ न खाय ।। 
सुरापान मद्य मांसाहारी। गमन करै भोगै पर नारी।।
सत्तर जन्म कटत है शीशं। साक्षी साहेब है जगदीशं।।


गरीब, भांग तम्बाखू पीव हीं, सुरा पान सैं हेत। 

 गोस्त मट्टी खाय कर, जंगली बनें प्रेत।।म





दहेज एक अभिशाप

दहेज एक अभिशाप है दहेज लेना और देना  पूर्ण परमात्मा के सविधान में महाअपराध है आज दहेज के कारण बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है क्योंकि दहेज के कारण बेटी एक बोज सा बन गई है जो पिता अपने कलेजे की पुत्री को दे देता है दान में उससे एक मनुष्य के लिए बड़ा दहेज और क्या होगा

दहेज आज समाज में अशांति का कारण बन गया है दहेज के कारण बहू बेटियों को मार दिया जाता है जिंदा जला दिया जाता है या बेटियां मजबूर होकर आत्महत्या कर लेती है दहेज देने वाले व्यक्तियों को भी नरक में उल्टा लटकाया जाता है








आज समाज में संत रामपाल जी महाराज के शिष्य दहेज मुक्त शादियां करते हैं दहेज लेते हैं और ना दहेज देते हैं संत रामपाल जी महाराज ने दहेज मुक्त भारत  का बीड़ा उठाया है सो सफल हो रहा है
आज समाज में इसी ज्ञान की जरूरत है जो पूर्ण परमात्मा का सही ज्ञान बताकर परमात्मा के संविधान से परिचित कराकर सही सत भक्ति का मार्ग बताते हैं और एक सभ्य समाज तैयार कर रहे हैं


नाचना  भक्ति मार्ग में बाधक है

गाना भगवान के संविधान के विरुद्ध है महात्मा गांधी से इंसान भगवान को भूल जाता है और बकवास करने लगता है अगर नाचने गाने  से भगवान मिलता तो कोई भगवान की याद में नहीं रोता

अश्लील फिल्में देखना ,नाटक देखना, जुआ खेलना, ताश खेलना मना है। इससे मनुष्य जीवन का अनमोल समय नष्ट होता है जो मोक्ष प्राप्ति के लिए मिला है।


कबीर मानुष जन्म दुर्लभ है, मिले न बारम्बार। तरूवर से पत्ता टूट गिरे, बहुर न लगता डारि ।।


भक्ति नही करने वाले या शास्त्रविरुद्ध भक्ति करने वाले को यम के दूत भुजा पकड़कर ले जाएंगे। उसकी पिटाई की जाएगी।

यह दम टूटै पिण्डा फूटै, हो लेखा दरगाह मांही।
उस दरगाह में मार पड़ैगी, जम पकड़ेंगे बांही।।

अब्दुल्लाह करने वाला या शास्त्र विरूद्ध भक्ति करने वाला 8400000 योनियों गधा घोड़ा बैल बन कर दुख उठाता है


नर से फिर पशुवा कीजै, गधा, बैल बनाई।

छप्पन भोग कहाँ मन बौरे, कहीं कुरड़ी चरने जाई।।




जो व्यक्ति परमात्मा के भक्त को सताते हैं, वह परमात्मा को दुखी करते हैं। जीव परमात्मा का अंश है तो अपने अंश के सुख-दुःख का परमात्मा को भी अहसास होता है।

कबीर कह मेरे जीव को, दुःख ना दिजो कोय ।
 भक्त दुःखाये मैं दुःखी, मेरा आपा भी दुःखी होय।।

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