Kabir Saheb

कबीर साहेब

Kabir Saheb

सत्यनाम


आज हम आपसे बात कर रहे हैं एक ऐसे महान  आत्मा के बारे में जो एक  महान संत हुए थे जो आज से 600 साल पहले आए थे जिसकी की वाणी को सुनकर आज लोग भाव विभोर हो उठते हैं उनकी वाणी में में इतना गूढ़ रहस्य छिपा हुआ है कि आज मनुष्य उसको समझ नहीं पाता है कौन है वह महान संत जिसके बारे में हम आपसे बात कर रहे हैं वह कबीर है                             
कबीर      कबीर          कबीर

लेकिन आज आम समाज उसे एक कवि की भूमिका देता है संत कबीर साहेब एक महान संत थे जिनके ज्ञान के आगे पूरी दुनिया का के संतों का ज्ञान फीका पड़ जाता है  

और ज्ञान सब ज्ञानड़ी कबीर ज्ञान सौ ज्ञान।
जैसे गोला तोप का करता चले मैदान।। 
  आज मानव समाज को संत कबीर साहेब के के ज्ञान की खास जरूरत है नहीं तो आज संसार जल मरता कबीर साहेब कहते थे कि मनुष्य को गुरु की आवश्यकता होती  है गुरु बनाएं बिना मोक्ष नहीं होता है वह भी पूर्ण गुरु होना चाहिए कबीर साहिब ने अपने दोहा चौपाईयो के माध्यम से समाज को गहरा ज्ञान दिया है कबीर साहेब कहते हैं

माता पिता मिल जाएंगे लक चौरासी माही ।
सतगुरु सेवा बंदगी फिर मिलन की नाही।। 
राम कृष्ण से कौन बड़ा उन्होंने भी गुरु कीन। 
तीन लोक के वे धनी गुरु आगे आधीन ।।



 कबीर साहिब की जीवन लीला


कबीर साहिब ने किसी मां से जन्म नहीं लिया है वह काशी के अंदर लहर तारा तालाब में कमल के फूल पर प्रकट हुई है जो पूर्ण भगवान के अवतार थे और उनको नेहरू और नीमा उठाकर लेकर आए थे  जिन्होंने उसका पालन पोषण किया था लेकिन उस समय यह मानव समाज उनको पहचान नहीं सका  उन्होंने अपने जीवन में  अपने 164 लाख से से बनाए थे और 120 वर्ष काशी में रहकर गए कपड़ा बुनने का काम करते थे और भक्ति किया करते थे जब उनकी अलौकिक मृत्यु हुई तब वह  स शरीर ही इस संसार से चले गए थे क्योंकि वह एक सामान्य व्यक्ति नहीं थे वह खुद पूर्ण परमात्मा थे वे इस संसार में मनुष्य समाज को मोक्ष का मार्ग बताने के लिए आए थे क्यों कि परमात्मा अजर अमर और अविनाशी होता है इस दुनिया में  राम कृष्ण   जैसे 10 अवतार हुए यह पूर्ण भगवान नहीं थे इन्होंने वहां से जन्म लिया और मृत्यु को प्राप्त हो गए पूर्ण परमात्मा को होता है जो जन्म नहीं लेता है और ना ही मरता है अभी शायद इस पूरी सृष्टि पर एक है जो शरीर की इस दुनिया में आए और से शरीर इस दुनिया से चले गए वह खुद परमात्मा थे और आज यह अंधा मानव समाज उसको एक संत या कवि कह कर ही संबोधित करते है

संत कबीर साहेब का चारों युगों में आगमन

संत कबीर साहेब चारों युगों में आए हैं सतयुग में सत सुकृत नाम से खेता में मुनेंद्र नाम से द्वापर में करुणामय नाम से और कलयुग में कबीर नाम से
इसका प्रमाण कबीर सागर में है
 कबीर के दोहे
गुरु गोविंद दोनों खड़े काके लागू पाय ।
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो मिलाय।।
माता पिता मिल जाएंगे लक चौरासी माही।।
 सतगुरु सेवा बंदगी फिर मिलन की नाही।।
पूर्ण संत की क्या पहचान होती है ?
 आज संपूर्ण मानव समाज में संतों की भरमार हो गई है आप इसमें यह पहचान करना मुश्किल हो जाता है कि पूर्ण संत कौन है उसकी पहचान कैसे की जाए और पूर्ण संत की शरण में गए बिना मोक्ष मिलता नहीं है


▪सतगुरु के लक्षण कहूं मधुरे बैन विनोद
 चार वेद छह शास्त्र कह अठारह बोध


         • ऊपर दी गई गरीबदास जी की वाणी में पूर्ण संत की                पहचान बताई गई है

     • इसी प्रकार श्रीमद् भागवत गीता में 15 अध्याय के श्लोक 1 से 4 में पूर्ण संत की पहचान बताई गई है



जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज पूर्ण संत है जो शास्त्र अनुकूल सत भक्ति बताते हैं















वेदों में प्रमाण है कबीर साहिब भगवान है ।
कुरान शरीफ में प्रमाण है कबीर साहिब भगवान है बाइबल में प्रमाण है कबीर साहिब भगवान है
 गीता में प्रमाण है कबीर साहिब भगवान है
 गुरु ग्रंथ साहिब में प्रमाण है कबीर साहिब भगवान है

सत साहेब

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